बॉलीवुड डेस्क. कोरियोग्राफर गणेश आचार्य इन दिनों भोपाल में फिल्म 'भुज द प्राइड ऑफ इंडिया' के डांस सीक्वेंसेस की शूटिंग कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने डांस और फिल्म इंडस्ट्री पर अपनी राय रखी। खास तौर पर उन्होंने अपने वजन को लेकर किए जाने वाले सवाल पर कहा कि मैं 200 KG का था तब भी डांस करता था और आज भी कर रहा हूं। गणेश आचार्य से बातचीत के खास अंश-
आज के डांसर्स की तुलना गोविंदा से नहीं कर सकते: इंडस्ट्री में एक मुकाम हासिल करने के बाद भी डाउन टू अर्थ बने रहने के सवाल पर वह कहते हैं- कलाकार को हमेशा डाउन टू अर्थ ही रहना चाहिए। मैंने अमिताभ बच्चन से सीखा है- प्यार दो प्यार लो। वो मेरे गॉडफादर हैं। गोविंदा से तालमेल अच्छा है, उनके साथ 150 से ज्यादा फिल्में की हैं। मेरा करियर उन्हीं ने बनाया है। आज के डांसर्स के साथ उनकी तुलना नहीं कर सकते हैं। तो इन लोगों ने ही हमें बनाया है, यह दिखावा नहीं कर सकते कि मैंने तो बचपन से ही सीखा है।
‘कौन कहता है मोटा आदमी डांस नहीं कर सकता? यह लोगों का भ्रम है। जब मेरा वजन 200 किलो होता था, तब भी मैंने डांस किया है। डांस बॉडी से नहीं, फीलिंग्स से किया जाता है। गोविंदा को ही लीजिए... चेहरे से डांस करते थे। डांस की भाषा फीलिंग्स हैं। आज डिसेबल पर्सन भी डांस करते हैं। उनके अंदर फीलिंग्स होती हैं।’
ऐसी रही गणेश की अब तक की जर्नी : गणेश बताते हैं कि- "मेरा करियर जब मैं पैदा नहीं हुआ था उसके पहले से शुरू हो गया था। मेरे पिता कृष्णा घोंपे साउथ के बहुत बड़े डांसर थे। मैं 10 साल का था तब उनका देहांत हो गया। उनका सपना था कि वे बहुत बड़े कोरियोग्राफर बनें, यही बात मेरे जहन में बचपन से घूमती रहती थी। लेकिन तब घर के हालात अच्छे नहीं थे। फिर मैंने 12 साल की उम्र में बैकग्राउंड जूनियर आर्टिस्ट के तौर पर काम करना शुरू किया। इसके बाद 15 साल में ग्रुप डांसर बना, जहां 500 डांसर हुआ करते थे और 17 साल की उम्र में असिस्टेंट कोरियोग्राफर बना। मैंने कमल मास्टर के पास काम किया। इसके बाद 19 साल में पहली बार डांस कोरियोग्राफर बना फिल्म ‘अनाम’ से। हालांकि बड़ा ब्रेक मिला डेविड धवन और गोविंदा की फिल्म ‘साजन चले ससुराल’ से। इसके तुम तो धोखेबाज हो... गाने और ‘कुली नंबर 1’ के गोरिया चुरा न मेरा जिया... से मुझे पहचान मिली। यह गाना अब फिर से कर रहा हूं। 25 साल पहले का डांस, कपड़े, टाइम, कैमरा सब बदल गया है... लेकिन उन गानों और डांस के विकल्प नहीं मिलते।
मुझे गुरु नहीं शिष्य बनकर ही रहना है: रियलिटी शो से जुड़े सवाल पर गणेश ने कहा- हां, रियलिटी शो से टैलेंट निकलता है। लेकिन मेरे लिए वहां कुछ नहीं है। मैं खुद को अभी उस मुकाम पर नहीं मानता कि दूसरों का टैलेंट जज करूं। मैं आज भी एक स्टूडेंट हूं तो पहले अपने आप को जज कर लूं फिर दूसरे को जज कर सकूंगा। मैं सीखते रहना चाहता हूं। मुझे गुरु नहीं शिष्य बनकर ही रहना है।